विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार उन्हें 24 घंटे के भीतर सुरक्षा मुहैया कराएगी
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के महासमर के बीच तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के भीतर पनप रही गुटबाजी और संभावित भितरघात को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। रविवार को उत्तर 24 परगना के संदेशखाली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने अनुशासन का डंडा चलाते हुए कार्यकर्ताओं को दो-टूक चेतावनी दी। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पार्टी की हर किसी पर नजर है, इसलिए वफादारी में रत्ती भर भी कमी भारी पड़ सकती है।
अभिषेक बनर्जी का यह बयान उन कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है, जो पर्दे के पीछे रहकर दूसरी पार्टियों के संपर्क में हैं। खेल की शब्दावली का प्रयोग करते हुए उन्होंने कहा कि इसे अंतिम चेतावनी समझें। यदि आपने एक पार्टी की जर्सी पहनी है, तो उसी के प्रति ईमानदार रहें। मैदान में उतरकर दूसरी टीम के लिए खेलने की कोशिश कतई न करें। राजनीतिक हलकों में इस बयान को चुनाव से ठीक पहले संगठन को एकजुट रखने और अंदरूनी बगावत को कुचलने की सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अभिषेक ने न केवल अपनों को चेताया, बल्कि विपक्ष पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और हुमायूं कबीर को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें रत्ती भर भी नैतिकता शेष है, तो वे केंद्र सरकार की सुरक्षा त्याग कर दिखाएं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार उन्हें 24 घंटे के भीतर सुरक्षा मुहैया कराएगी। केंद्र पर अल्पसंख्यकों के उत्पीडऩ का आरोप लगाते हुए अभिषेक ने कार्यकर्ताओं को 22-0 का लक्ष्य दिया। उन्होंने हुंकार भरी कि भाजपा को एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तृणमूल महासचिव ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदान से ठीक पहले उच्चाधिकारियों के तबादले इस तरह किए गए हैं, जिससे राम नवमी के दौरान भाजपा को अशांति फैलाने का अवसर मिल सके। राम नवमी के जुलूसों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग शस्त्र लेकर और नशे की हालत में उत्सव मनाते हैं, उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों को समझा ही नहीं। जीत के प्रति पूर्ण आत्मविश्वास जताते हुए अभिषेक ने अंत में कहा कि चुनाव के बाद विरोधियों को रेड कार्ड दिखाकर विदा कर दिया जाएगा। उनके इस आक्रामक तेवर ने साफ कर दिया है कि तृणमूल इस बार चुनावी बिसात पर किसी भी प्रकार के ढुलमुल रवैये के पक्ष में नहीं है।